Subhash Chandra Bose Biography in Hindi | सुभाष चन्द्र बोस का जीवन परिचय

Subhash Chandra Bose Biography in Hindi? दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में मैं भारत के महान स्वतंत्री सेनानी सुभाषचंद्र बोस के बारे में बात करने वाले जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अपनी जान के बारे में भी नहीं सोचा और इस देश के लिए शहीद हो गए |

हम यह तो जानते हैं कि हमारे देश को 1947 में आजादी मिली लेकिन बहुत से लोगों को यह नहीं पता है कि हमारे देश को आजाद करने के लिए किन-किन महान लोगों ने अपनी जान की भी बाज़ी लगा दी जिसमें से एक नेताजी सुभाषचंद्र बोस हैं | अगर आप सुभाषचंद्र बोस के जीवन के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं जैसे इनका जन्म कहाँ हुआ था, देश को आजाद करने में उनका क्या योगदान था और उनकी मृत्यु कैसे हुई इसी तरह की और भी सवालों के जवाब जानना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को अंत तक ज़रूर पढ़े |

All About Netaji Subhash Chandra Bose

पूरा नाम नेताजी सुभाषचंद्र बोस
जन्मतिथि 23 जनवरी 1897
जन्म स्थान कटक, उड़ीसा
पिता का नाम जानकीनाथ बोस
माता का नाम प्रभावती देवी
पत्नी का नाम एमिली (1937)
बेटी का नाम अनीता बोस
मृत्यु 18 अगस्त 1945

सुभाषचंद्र बोस का जीवन परिचय (Subhash Chandra Bose Biography in Hindi)

सुभाषचंद्र बोस का पूरा नाम नेताजी सुभाषचंद्र बोस था | इनका जन्म 23 जनवरी 1897 में उड़ीसा के कटक शहर में एक बंगाली परिवार में हुआ था | उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस था जो पेशे से एक वकील थे और उनके माता का नाम प्रभावती बोस था | सुभाषचंद्र बोस के 7 भाई और 6 बहन थे और वह अपने माता-पिता के 9वें संतान थे |

सुभाषचंद्र बोसे बचपन से ही पढ़ाई में बहुत दिलचस्ती रखते थे इसलिए वह अपने स्कूल में अपने सभी टीचर के पसंदीदा विद्यार्थी थे | उन्होंने अपनी शुरूआती पढ़ाई Protestant European School से पूरी की और साल 1913 में मेट्रिक में सफल होने के बाद उनका एडमिशन Presidency College में करवा दिया गया | सुभाषचंद्र बोस बचपन से ही स्वामी विवेकानंद और राम कृष्ण के विचारों से काफी प्रभावित थे और इन्ही महापुरुषो से प्रेरित होकर बोस को लगा की उन्हें पढ़ाई लिखाई से ज़्यादा देश के हिट में काम करना है |

उस समय भारत में ब्रिटिश सरकार की हुकूमत थी जो भारतीयों पर जुल्म करने में कभी भी पीछे नहीं हटते थे | अपने पास भारतीयों पर अत्याचार को देखकर बोस के मन में स्वतंत्रता की भावना जग गई और वह अपने कॉलेज में एक प्रोफेसर के द्वारा भारतीयों के बारे में भला-बूरा कहे जाने पर उनसे लड़ गए थे | इसके बाद बोस ने साल 1918 में University of Calcutta के Scottish Church College से अपनी BA की पढ़ाई पूरी की |

अपनी ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद बोस देश की सेवा में लग जाना चाहते थे लेकिन अपने पिता के कहने पर बोस को इंग्लैंड जाना पड़ा क्यूंकि उनके पिता चाहते थे कि वह एक अच्छी सी नौकरी करे | इसके बाद वह कैंब्रिज में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वह Indian Civil Services के एग्जाम में 4th रैंक से पास हुए | लेकिन इतना अच्छा रैंक होने के बावजूद भी उन्होंने अपनी नौकरी ठुकरा दी क्यूंकि वह ब्रिटिश सरकार के अन्दर नौकरी करना नहीं चाहते थे |

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सुभाषचंद्र बोस का राजनीतिक जीवन

सुभाषचंद्र बोस ने भारतीय लोगों के दिलो में आजादी की आशा जगाने के लिए उन्होंने एक newspaper प्रिंट किया जिसका नाम Swaraj था और इसमें उनके मार्गदर्शक बने उन समय के महान नेता चित्रन्जक दास जो देशभक्ति से जुड़े भड़काओ भाषण देने के लिए जाने जाते थे | साल 1923 में सुभाषचंद्र बोस के काम को देखते हुए उन्हें All India Youth Congress का प्रेसिडेंट बना दिया गया | लेकिन स्वतंत्रता के लिए लोगों को भड़काने के आरोप में बोस को जेल में दाल दिया गया यहाँ उन्हें TB की बीमारी हो गई |

जेल से रिहा होने के बाद उन्हें साल 2017 में congress party का general secretary के रूप में चुन लिया गया और वह जवाहरलाल नेहरु के साथ आजादी के जंग में कूद पड़े | साल 1930 में सुभाषचंद्र बोस यूरोप गए जहाँ वह कुछ नेताओं के साथ मिलकर party को और भी अच्छे से चलाने के बारे में सीखा और इसी दौरान उन्होंने अपनी किताब The Indian Struggle को भी पब्लिश किया | हलांकि लन्दन में पब्लिश किये गए इस किताब को ब्रिटिश सरकार ने बैन कर दिया था और भारत वापस आने पर बोस को कांग्रेस पार्टी का प्रेसिडेंट बना दिया गया |

हलांकि अहिंसा के रास्ते पर चलकर आजादी पाने के सोच रखने वाले गाँधीजी सुभाषचंद्र बोस की हिंसा की नीति को पसंद नहीं करते थे और यह बात जब बोस को पता चली तब उन्होंने कांग्रेस प्रेसिडेंट से इस्तीफा देना ही सही समझा और इस्तीफा दे दिया | इसके बाद सुभाषचंद्र बोस पूरी दुनिया में घूमकर समर्थन की मांग की जिसकी वजह से ब्रिटिश सरकार पर दबाव पड़ने लगा |

दूसरी युद्ध के समय ब्रिटिश सरकार चाहती थी कि भारत की आर्मी उनके समर्थन में जंग लड़ें लेकिन सुभाषचंद्र बोस ने इसका जमकर विरोध किया क्यूंकि वह नहीं चाहते थे कि ब्रिटिश सरकार की जीत के लिए भारत की आर्मी अपनी जान दाव पर लगाये | हलांकि इसके लिए उन्हें फिर से जेल में दाल दिया गया लेकिन वह यहाँ पर भी चुप नहीं बैठे और जेल में ही भूक हड़ताल कर दिया जिसके कारण उन्हें सात दिनों में ही जेल से रिहा कर दिया गया | जेल से रिहा करने के बाद बोस को CID के देख-रेख में उन्हें अपने ही घर में नज़रबंद कर दिया गया था लेकिन बोस 16 जनवरी 1941 को पठान का रूप धारण करके CID को चकमा देने में कामयाब हो गए और भारत की आजादी के लिए वह ब्रिटिश के दुश्मन देश जर्मनी के लिए रवाना हो गए और यहाँ पर हिटलर ने भारत को समर्थन देने का वादा किया |

लेकिन जब विश्वयुद्ध में जर्मनी की हार होने लगी तब वह एक सबमरीन से जापान चले गए और बोस के मजबूत इरादों को देखते हुए जापान के प्रदानमंत्री भारत को सहयोग देने के लिए तैयार हो गए | जापान के साथ मिलकर सुभाषचंद्र बोस जी ने आजाद हिन्द फ़ौज की स्थापना की जिसे लोग INA या Indian National Army के नाम से भी जानते थे | और फिर south-east एशिया में रह रहे भारतीयों के सहयोग से INA (Indian National Army) में मजबूती आई | इसी दौरान नेताजी ने “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा” जैसे भड़कीले नारे लगाकर भारतीयों लोगों में ब्रिटिश सरकार से लड़ने की इच्छा को और भी बढ़ा दी |

जापान के हार के बाद भारत को आर्थिक मदद और हथ्यार मिलने बंद हो गए और नेताजी को मजबूरन INA को बंद करना पड़ा |

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सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु (Subhash Chandra Bose Death)

18 अगस्त 1945 को एक विमान दुर्घटना में सिर्फ 48 वर्ष की उम्र में ही नेताजी की मौत हो गई लेकिन उनकी बॉडी का पता नहीं चल सका लेकिन समय के बाद नेताजी को मृत्यु घोषित कर दिया गया | हलांकि उनके द्वारा लगाईं गई स्वतंत्रता की चिंगारी से भारत को 1947 में आजादी दिला दी |

सुभाषचंद्र चंद्र बोस की जयंती (Subhash Chandra Bose Jayanti 2022)

नेताजी का जन्म 23 जनवरी को हुआ था और भारत में इस दिन को नेताजी के याद में सुभाषचंद्र बोस जयंती के रूप में मनाया जाता है | 23 जनवरी 2022 को हम उनके 125वें जन्मदिन के रूप में सुभाषचंद्र बोस जयंती मनाने जा रहे हैं |

सुभाषचंद्र बोस से जुड़े कुछ सवाल जो अक्सर पूछे जाते है

सुभाषचंद्र बोस का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

नेताजी का नाम 23 जनवरी 1897 को कटक, उड़ीसा में हुआ था |

साल 2022 में सुभाषचंद्र बोस की कितनी जयंती मनाने जा रहे हैं?

125वां जयंती

सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु कब हुई थी?

सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को हुआ था |

सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु कैसे हुई थी ?

सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु विमान दुर्घटना में हुई थी |

निष्कर्ष :

दोस्तों, आज के इस आर्टिकल (सुभाषचंद्र बोस का जीवन परिचय) में मैंने आपको भारतीय स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन को करीब से जानने की कोशिश की है जिन्हों भारत को आजादी दिलाने के लिए अपनी जान की बाज़ी लगा दी थी | अगर आपने इस आर्टिकल को पूरा पढ़ा होगा तो मुझे उम्मीद है कि आपको सुभाषचंद्र बोस के जीवन के बारे में काफी जानकारी हो गई होगी |

अगर आपको इस आर्टिकल Subhash Chandra Bose Biography in Hindi से सम्बंधित कोई सवाल है तो आप नीचे कमेंट में लिखकर ज़रूर बताये और अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया है तो आप इस आर्टिकल को सोशल मीडिया पर ज़रूर शेयर करें ताकि लोग इनके बारे जान सके और इनसे प्रेरणा लेकर इन्हीं की तरह देशभक्त बन सके |

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