Top 24 Moral Story For Kids in Hindi 2022: मनपसंद कहानियाँ

आज के इस आर्टिकल में हम आपको new story for kids in hindi के बारे में बताने वाले हैं| अगर आप कहानियाँ पढ़ना पसंद करते हैं या फिर आप अपने बच्चो के लिए कहानियाँ की तलाश कर रहे हैं तो आप बिल्कुल सही जगह आये हैं| इस आर्टिकल में आपको नई से लेकर पुरानी हर तरह की मनपसंद कहानियाँ मिल जायेगी जो आपको और आपको बच्चो को बहुत पसंद आने वाला है|

इन कहानियों में से कुछ new shorts moral story for kids in hindi 2022 दी गई है जिसे पढ़कर आपको और आपके बच्चो को बहुत ज़्यादा आनंद आएगा| तो चलिए story for kids in hindi की उन सभी कहानियों को देखते हैं|

24 Story for Kids in Hindi

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24 Story for Kids in Hindi

नटखट चूँहा | Story for Kids in Hindi

नटखट चूँहा

एक चूँहा था| वह बहुत ही नटखट और बहुत ज़्यादा चालाक था| उसका हर वक़्त कुछ न कुछ शरारत करने का मन करता ही रहता था| एक दिन चून्हे ने अपने मन में सोचा कि शहर की तरफ चला जाए, बारिश की वजह के कारण बिल से बाहर निकले बहुत दिन हो गए हैं| नटखट चूँहा झटपट तैयार होकर शहर की तरफ चल पड़ा| रास्ते में उसे एक कपड़े की दूकान दिखाई दी, चूँहा उस कपड़े की दूकान में चला गया|

जैसे ही दुकान के मालिक को चून्हे पर नज़र पड़ी, उसने चुन्हे से कहा अरे तू यहाँ क्या कर रहा है? चल भाग यहाँ से| चूँहा बोला मैं अपनी टोपी के लिए कपड़ा लेने आया हूँ| यह सुनकर दुकानदार हंसने लगा और बोला मैं चून्हों को कुछ नहीं बेचता| चूँहा गुस्से में चिल्लाकर बोला “तू मुझे कपड़ा देता है या नहीं?”, दूकानदार बोला नहीं बिल्कुल नहीं|

इस बार नटखट चूँहा दुकार्दार के सामने गाना गाने लगा “रातों रात मैं आयूंगा, अपनी सेना लाऊंगा, तेरे कपड़े कतरूंगा”| यह सुनकर दुकानदार डरकर बोला चून्हे भैया ऐसा ना करना, मैं अभी तुम्हे रेशमी कपड़े का टुकड़ा देता हूँ| दुकानदार ने उसे एक कपड़े का टुकड़ा दिया| चूँहा उछलता कूदता दूकान से बाहर निकल गया और अपने कपड़े को लेकर चला गया|

इस कहानी से क्या सिख मिला: समझदारी से हर काम किया जा सकता है|


सूरज और हवा की लड़ाई | Story for kids in Hindi

सूरज और हवा की लड़ाई

एक बार हवा और सूरज में बहस हो गई| हवा ने सूरज से कहा, “मैं तुझसे ज़्यादा ताकतवर हूँ”| सूरज ने हवा से कहा, “मुझमें तुझसे ज़्यादा ताकत है”|

इतने में वहाँ से एक आदमी गुज़र रहा था| हवा ने कहा, जो उस आदमी के कोट उतरवा देगा वो सबसे ज़्यादा ताकतवर होगा| सूरज हवा की बात मान गया और कहा, “ठीक है पहले तुम अपनी ताकत दिखाओ”|

हवा ने अपनी ताकत दिखाना शुरू किया| हवा बहुत तेज़ से चलने लगी जिससे उस आदमी की टोपी उड़ गई लेकिन वह अपनी कोट दोनों हाथ से पकड़ लिया| हवा और जोर से चलने लगी| आदमी ज़मीन पर गिर गया और अपनी कोट को जोर से पकड़ लिया| आखिर में हवा थक गया, लेकिन आदमी के शरीर से कोट नहीं गिरी|

सूरज ने हवा से कहा, “अब तुम मेरी ताकत देखो”| सूरज ने तपना शुरू किया| आदमी ने अपने कोट के बटन खोल दिए| सूरज ने अपनी गर्मी और बढ़ाई| आदमी ने कोट को उतार दिया और अपने हाथ में लेकर वहां से चला गया|

सूरज ने हवा से कहा, “देखी मेरी ताकत? उतरवा दिए न उस आदमी के कोट”| हवा ने सूरज को हाथ जोड़कर नमस्कार किया और कहा मान गया तुम्हारी ताकत को|

Moral of this story for kids: अपने ताकत पर कभी घमंड नहीं करना चाहिए|


दोस्त की मदद | Story for Kids in Hindi

दो दोस्त

एक तालाब में एक कछुआ रहता था| उसकी दोस्ती उस तालाब के पास माँद में रहने वाली एक लोमड़ी से हो गई| एक दिन वह दोनों तालाब के किनारे बैठकर बाते कर रहे थे कि एक तेंदुआ वहाँ आ गया|

तेंदुआ को देखकर दोनों अपनी जान बचाने के लिए अपने-अपने घर की तरफ भागे| लोमड़ी झटपट दौड़कर अपनी माँद में पहुँच गई| कछुआ अपनी धीमी रफ़्तार की वजह से तालाब तक नहीं पहुँच सका| तेंदुआ ने एक छलांग लगाया और कछुआ तक पहुँच गया|

तेंदुआ ने कछुआ को अपने मुँह से पकड़ लिया और उसे खाने के लिए पेड़ के नीचे चला गया| तेंदुए की दांतों और पंजो का पूरा जोर लगाने पर भी कछुआ की मजबूत खोल को एक खरोच तक नहीं आई| लोमड़ी अपने माँद से छुपकर यह सब देख रही थी|

लोमड़ी ने कछुए को बचाने की तरकीब सोची| उसने अपने माँद से ही मीठी आवाज़ में बोली, “तेंदुए जी, कछुए की खोल को तोड़ने का मैं आसान तरीका बताती हूँ| उसे पानी में फ़ेंक दो| थोड़ी देर में पानी से इसका खोल नरम हो जायेगा| आप आजमाकर देख सकते हैं|

तेंदुए ने कहा, “ठीक है यह भी करके देख लेता हूँ”| यह कहकर तेंदुए ने कछुए को पानी में फ़ेंक दिया| बस फिर क्या था, कछुआ गया पानी में, और उसकी जान बच गई|

इस कहानी से क्या सिख मिलती है: हमेशा दोस्त की मदद करनी चाहिए|


शेखीबाज़ मक्खी | Story for kids in Hindi

शेखीबाज़ मक्खी

एक जंगल में एक शेर भोजन करके आराम कर रहा था| इतने में उड़ते-उड़ते एक मक्खी वहाँ आ पहुंची| मक्खी शेर के कान में भिन-भिन करने लगी| शेर को गुस्सा आ गया| शेर ने जोर से दहाड़ा और कहा अरे मक्खी दूर हट वरना जान से मार दूंगा|

मक्खी बोली, “मैं क्या तुझसे डर जाऊँगी? मैं तो तुमसे लड़ भी सकती हूँ| अगर हिम्मत है तो आओ मुझसे मुकाबला करो”| शेर आग बबूला हो गया| उसने कान के पास पंजा मारा| मक्खी तो उड़ गई लेकिन शेर का कान छिल गया|

मक्खी फिर शेर के नाक पर बैठ गई| शेर ने नाक पर पंजा मारा| मक्खी फिर उड़ गई और शेर का नाक छिल गया| शेर पंजा मरता जाता और खुद को घायल करता जाता| अंत में शेर थक गया| वह बोला, “मक्खी बहन मुझे माफ़ कर दो”| तुम जीत गई और मैं हार गया|

घमंड में चूर होकर मक्खी वहाँ से आगे चली गई| रास्ते में उसे एक हाथी मिला| मक्खी ने कहा, “अरे हाथी मुझे प्रणाम कर”| मैं अभी-अभी एक शेर को हर कर आ रही हूँ| हाथी ने उसे प्रणाम किया और वहाँ से चला गया|

सामने खड़े होकर एक लोमड़ी यह सब देख रही थी और मन ही मन मुस्कुरा रही थी| इतने में मक्खी ने लोमड़ी को बुलाया और उससे कहा, “अरे ओ लोमड़ी मुझे प्रणाम कर”| मैंने अभी-अभी जंगल का राजा शेर और एक बड़े हाथी को हराया है|

लोमड़ी ने उसे प्रणाम किया और धीरे से बोली, “मक्खी रानी ऊधर वो मकड़ी दिखाई दे रही है न, वह आपको गाली दे रही है”| यह सुनकर मक्खी बोली, “उस मकड़ी को तो मैं चुटकी बजाते ख़तम कर दूंगी”|

यह बोलकर मक्खी मकड़ी की तरफ झपटी और मकड़ी की जाल में फँस गई| वह जितना निकलने की कोशिश करती उतना ही ज़्यादा फंसती जाती| अंत में थक कर मक्खी हार मान गई| यह देखकर लोमड़ी मन ही मन मुस्कराते हुए वहां से चली गई|

इस कहानी से आपने क्या सिखा: कभी भी घमंड नहीं करनी चाहिए|


सियारों का झुंड और हाथी | Story for kids in Hindi

सियारों का झुंड और हाथी

एक जंगल में सियारों का एक झुंड रहता था| उनकी नज़र एक हाथी पर पड़ी| सियारों को उस हाथी का मांस खाने का मन किया| इतने में एक बूढ़ा सियार बोला, “मेरे पास एक तरकीब है जिससे हम इस हाथी का मांस खा सकते हैं”|

वह बूढ़ा सियार उस हाथी के पास गया और बोला, “हाथी जी जंगल के सभी जानवरों ने तय किया है कि आपको जंगल का राजा बनाया जाए| क्योंकि आप जंगल के सबसे बड़े और शक्तिशाली जानवर है”| हाथी सियार की मीठी बातो में आ गया गया और उसके साथ चल पड़ा|

उस बूढ़े सियार ने हाथी को एक झील के पास ले गया| जहाँ हाथी का पैर फिसला और वह कीचड़ में फँस गया| हाथी जितना कोशिश करता उस कीचड़ से बाहर आने की वह उतना ही ज़्यादा फंसता जाता|

हाथी ने आवाज लगाईं, “दोस्तों मेरी मदद करो मैं फँस गया हूँ”| इतने में सियार ने हाथी से मुस्कराकर कहा, “हाथी जी आपने मेरे जैसे जानवर पर विश्वास कैसे किया| मैं आपसे झूठ बोल रहा था| हम सभी आपका मांस खाना चाहते थे| अब आपको इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी होगी|

हाथी कीचड़ से बहार नहीं आ सका| हाथी कुछ देर के बाद मर गया| इसके बाद सभी सियारों ने हाथी के गोस्त की जमकर दावत उड़ाई|

Moral of story for kids in hindi: समझदारी हर मुश्किल काम को आसान बना देती है|


चींटी और कबूतर | Story for kids in Hindi

चींटी और कबूतर

एक बार एक चींटी पेड़ से नीचे तालाब में गिर गई| उसी पेड़ पर बैठे एक कबूतर को चींटी को पानी में डूबता देखा| कबूतर ने चींटी को बचाने के लिए जी-जान लगा दी| आखिर में कबूतर ने पानी में चींटी के पास एक पत्ता फेंका| चींटी तुरंत उस पत्ते पर चढ़ गई| चींटी ने हाथ जोड़कर उस कबूतर को धन्यवाद किया|

कुछ दिनों के बाद जंगल में एक बहेलिया आया| बहेलिया का तो काम ही होता है पक्षियों को पकड़ना| उसने जमीन पर कुछ गेंहूँ के दाने फेंके और वहां एक जाल बिछा दिया| कबूतर गेंहूँ को देखकर उसे खाने के लिए धीरे-धीरे नीचे आ रहा था|

इतने में वह चींटी वहां से गुज़र रही थी| उसने जब जाल देखा तो उसने बहेरिया को बहुत ही जोर से काटा| बहेरिया जोर से चिल्लाया| यह सुनकर कबूतर चौकन्ना हो गई और वहां से उड़कर चली गई| इस तरह कबूतर की जान बच गई|

कहानी से क्या सिख मिलती है: जो आपकी मदद करे, आपको भी उसकी मदद करनी चाहिए|


तीन मछली | Story for kids in Hindi

तीन मछली

एक खूबसूरत तालाब में तीन मछलियाँ रहती थी| तीनो बहुत ही अच्छी दोस्त थी| तीनो हर जगह एक साथ जाया करती थी| यह तीनो खूब मजे से रह रहे थे| एक दिन तालाब के किनारे से दो मछुआरे गुज़र रहे थे|

एक मछुआरे ने दुसरे मछुआरे से कहा, “देखो इस तालाब में कितनी ज़्यादा मछली है| अगर हम इन्हें पकड़े तो हम उन्हें बेचकर बहुत पैसा कमा सकते है”| दुसरे मछुआरे ने कहा, “ठीक है हम कल अपने जाल लेकर आयेंगे”|

मछुआरे कि यह बात तीनो मछलियों ने सुन ली| तीनो मछलियों में से एक मछली ने कहा, “चलो हम इस तालाब को छोड़कर दुसरे तालाब में चले जाते हैं”| लेकिन बाकी दोनों मछलियाँ जाने से मना कर दिया|

तीनो में से एक मछली उस तालाब को छोड़कर दुसरे तालाब में चली गई| दुसरे दिन मछुआरे अपने जाल के साथ आये| उन्होंने पानी में अपना जाल फेंका| सभी मछलियाँ उस जाल में फँस गई| दोनों मछली दोस्त भी इस जाल में फँस गई|

दोनों दोस्तों में से एक मछली ने हिलना बंद कर दिया| वह मरने की नाटक करने लगी| मछुआरे ने use मर समझकर वापस पानी में फ़ेंक दिया| पानी में जाते ही वह मछली तैरकर दूसरे तालाब में चली गई| इस तरह उस मछली की चालाकी की वजह से उसकी जान बच गई|

Moral story in hindi तीन मछली: मुसीबत में हमेशा समझदारी से काम लेना चाहिए|


धोकेबाज़ भेड़िया | Story of kids in Hindi

धोकेबाज़ भेड़िया

बहुत दिनों पहले की बात है| एक भेड़िया भोजन की तलाश में जंगल से शहर की तरफ निकाल पड़ा| शहर पहुंचते ही शहर के कुत्ते ने उसे दौड़ाना शुरू कर दिया| भेड़िया अपनी जान बचाने के लिए एक घर में घुस गया| भेड़िया उस घर में रखे ब्लू रंग की पानी में गिर गया| भेड़िया पूरी तरह से नीला हो गया था| भेड़िया पूरा दिन उसी पानी में छिपा रहा|

दुसरे दिन भेड़िया उस पानी से बाहर निकला| बाहर निकलते ही उसने जंगल में जाना समझदारी समझी| वह जंगल की तरफ निकल पड़ा| रस्ते में वह एक तालाब के किनारे पानी पीने के लिए रूका| उसने जान पानी में देखा तो वह पूरी तरह से नीला हो गया था|

भेड़िया ने सोचा कि क्यूँ न इस मौके का फायदा उठाया जाए| उसने जंगल के सभी जानवरों को बुलाया और उनसे कहा, “मुझे परमात्मा ने भेजा है तुम्हारा राजा बनने के लिए| इसलिए आज से मैं तुम्हारा राजा हूँ”|

यह सुनकर सभी जानवर डर गए और उसे अपना राजा मानने लगे| एक दिन भेड़ियों का एक झुंड जंगल में जोर-जोर से चिल्ला रहे थे| यह सुनकर वह नीला भेड़िया भी चिल्लाने लगा|

यह देखकर शेर समझ गया कि इसे परमात्मा ने नहीं भेजा है| यह तो एक भेड़िया है| शेर ने उस भेड़िया पर हमला किया और भेड़िया का काम तमाम कर दिया|

Moral of story for kids in hindi धोकेबाज़ भेड़िया : धोका देने वाला एक न एक दिन पकड़ा ही जाता है|


मुर्ख गधा | Story for kids in Hindi

मुर्ख गधा

एक समय की बात है| किसी गाँव में एक धोबी रहता था| एक रत जब वह सो रहा था| उसके घर के अन्दर चोर घुस आया| धोबी के पास एक कुत्ता और एक गधा थे| वह दोनों एक खुट्टे से बंधे हुए थे|

चोर को देखकर गधे ने कुत्ते से बोला, “कुत्ते भाई घर में चोर आया है और तुम उसे देखकर भोंक नहीं रहे हो| तुम्हे तो भोंकना चाहिए ताकि मालिक होशियार हो जाए|”

कुत्ते ने गधे से बोला, “तुम ठीक कह रहे हो| लेकिन तुम तो जानते हो मैं दिन-रात मालिक की घर की चौकीदारी करता हूँ और तुम भी बहुत काम करते हो| लेकिन हमें क्या मिलता है? दो वक़्त का खाना भी हमें सही से नहीं मिलता है| जबतक मालिक का कुछ नुकसान नहीं होगा तब तक मालिक हमारी कदर नहीं करेंगे”|

यह सुनकर गधा बोला, “यह सही नहीं है| मैं तुम्हारी तरह नहीं हूँ|” यह कहकर गधा जोर-जोर से चिल्लाने लगा| गधे की आवाज़ सुनकर धोबी उठा गया|

धोबी बहुत ज़्यादा गुस्से में था| उसने एक लाठी उठाई और गधे को बहुत मारा| गधा धोबी की मार की वजह से वहीं पर ही अपना दम तोड़ दिया|

इस कहानी से क्या सिख मिलती है: अपने काम से काम रखो, दुसरे के काम में टांग न अड़ाओ|


कुत्ता और खरगोश | Story for kids in Hindi

कुत्ता और खरगोश

एक कुत्ते ने अचानक एक खरगोश को देखा| कुत्ता जोर-जोर से खरगोश पर भोंकने लगा| खरगोश डरकर वहाँ से भंगने लगा| कुत्ता भी उसके पीछे-पीछे भागने लगा|

खरगोश आगे-आगे भाग रहा था और उसके पीछे-पीछे कुत्ता भाग रहा था| खरगोश कुत्ते से तेज़ दौड़ रहा था| उसने कुत्ते को पीछे छोड़ दिया और अपनी जान बचा ली|

कुत्ता निराश होकर घर लौट आया| उसे खली हाथ लौटते देख घर के बाकि जानवरों ने उसका मजाक उड़ाया|

अपना मजाक उड़ता देख कुत्ता बोला, “आप यह क्यूँ नहीं समझते? मैं तो खाना खाने के लिए दौड़ रहा था| लेकिन खरगोश तो अपना जीवन बचाने के लिए दौड़ रहा था”|

इस कहानी के उददेश: जीवन सबसे अनमोल है|


जैसी करनी वैसी भरनी | Story for kids in Hindi

जैसी करनी वैसी भरनी

एक अमीर बुढ़िया की आँखों की रौशनी चली गई| वह एक डॉक्टर के पास अपने इलाज़ के लिए गई| बुढ़िया ने डॉक्टर से कहा, “मेरे पास बहुत कुछ है| अगर मेरी आँखों की रौशनी वापस आ गई| तो मैं तुम्हे इनाम दूंगी लेकिन रौशनी नहीं आई तो तुम्हे कुछ नहीं मिलेगा| डॉक्टर ने बोला, “ठीक है मुझे मंजूर है| मैं कल से आपके घर आकर आपका इलाज़ शुरू कर दूंगा”|

बुढ़िया के घर आने के बाद डॉक्टर के मन में लालच आ गया| वह एक-एक करके बुढ़िया के सारे सामान चुराने लगा| डॉक्टर ने उस बुढ़िया के घर जाना भी बंद कर दिया| एक दिन बुढ़िया की आँखों की रौशनी वापस आ गई| बुढ़िया ने अपने घर के पीछे खज़ाना छुपाकर रखा था| उसने उस खजाने को निकाला और फिर मौज की जिंदगी गुज़ारने लगी|

यह देखकर डॉक्टर हैरान हो गया| उसने राज़ दरबार में बुढ़िया की शिकायत लगा दी| राज़ दरबार में बुढ़िया ने कहा, “मैंने इससे कहा था कि अगर मेरी आँखे सही हो गई तो मैं इसे इनाम दूंगी| लेकिन इसने मेरे घर के सारे सामान को ही चुरा लिया| आप बताये महाराज इसमें मेरी क्या गलती है”|

यह सुनकर राजा ने बुढ़िया को छोड़ दिया| राजा ने डॉक्टर को बुढ़िया के सारे सामान को लौटाने का हुक्म दिया|

Moral of story in hindi for kids: जैसा को तैसा मिलना चाहिए|


एकता में बल है | Story for kids in Hindi

एकता में बल है

एक गाँव में एक ज़मीदार रहता था| वह इतना अमीर था कि गाँव के सभी लोग उसे सबसे सुखी इंसान समझते थे| लेकिन ऐसा नहीं था| उस ज़मींदार के तीन बेटे थे| वह आपस में हमेशा झगड़ते रहते थे| यह देखकर ज़मींदार हमेशा परेशान रहता था|

एक दिन ज़मींदार लकड़ी का गट्ठर ले आया| उसने अपने तीनों बेटो को अपने पास बुलाया| ज़मींदार ने अपने बेटो से एक-एक करके उस गट्ठर को तोड़ने को कहा| तीनों बारी-बारी करके उस गट्ठर को तोड़ने की कोशिश की| लेकिन वह किसी से नहीं टूटा|

ज़मींदार ने फिर उस गट्ठर को खोल दिया| ज़मींदार ने उनसे कहा, “इन्हें एक-एक करके तोड़ दो”| उन्होंने बहुत ही आसानी से उसे तोड़ दिया| उसमें से बड़े बेटे ने पुछा, “पिताजी आपने हमें इसे तोड़ने को क्यूँ दिया”|

जमींदार मुस्कराया और बोला, “तुम भी इन लकड़ियों की तरह हो| जब तुम साथ रहोगे तो तुम्हे कोई नहीं हर सकेगा| लेकिन जब तुम अलग-अलग हो जाओगे तो तुम्हे हर कोई हरा देगा”| यह सुनकर तीनों बेटों ने कभी आपस में नहीं लड़ने का वचन लिया|

कहानी से क्या सिखा: एकता में बल है|


सोने का अंडा | Hindi story for kids

सोने का अंडा

एक बार एक किसान को एक ऐसी मुर्गी मिली जो रोज़ एक सोने का अंडा देती थी| किसान रोज़ एक अंडे को लेता और बाज़ार में बेच आता था| वह रोज़ अपने परिवार के लिए नए-नए कपड़े और सामान लेकर आता|

किसान के पास धीरे-धीरे बहुत पैसे होने लगे| उसने बहुत सारा गाय, भैंस, घोड़े खरीद खरीद लिया| वह धीरे-धीरे गाँव का सबसे अमीर इंसान बन गया| उसने अपने लिए नहु बड़ा महल बनवाया| वह अपनी जिंदगी मौज में गुज़ारने लगा|

एक बार उसकी बीवी ने उससे बोला, “यह मुर्गी रोज़ एक सोने का अंडा देती है| सोचो इसके पेट में कितना ज़्यादा अंडा होगा”| किसान बोला, “बात तो तुम्हारी सही है| लेकिन उस अंडे को इसके पेट से निकले कैसे?”

उसकी बीवी ने कहा, “हम इसका पेट को फाड़कर सारे अंडे को निकाल लेते है| उसके बाद हम और भी ज़्यादा अमीर हो जायेंगे”| किसब बोला,” ठीक है|”

जैसे ही किसान ने उसका पेट फाड़ा| मुर्गी मर गई और किसान को उसके पेट से एक भी अंडे नहीं मिले|

इस कहानी से क्या सिख मिली: लालच करना हमेशा बुरी बला है|


बिल्ली के गले में घंटी | Hindi story for kids

बिल्ली के गले में घंटी

एक घर में बहुत सारे चून्हे रहते थे| उन सभी की जिंदगी हस्ते-खेलते बहुत ही अच्छे से गुज़र रही थी| एक दिन घर का मालिक घर में एक बिल्ली लेकर आ गया| बिल्ली को देखकर सभी चूँहो के होश उड़ गए|

बिल्ली देखने में बहुत डरावनी थी| उस बिल्ली बहुत ज़्यादा दूध पीने को मिलता था| लेकिन फिर भी उसकी भूख नहीं मिटती थी| वह रोज़ दो से तीन चूँहो को पकड़कर खा ही जाती थी| यह देखकर चुन्हें बहुत परेशान थे|

चूँहो ने एक सभा बुलाई| सभा में हर छोटे-बड़े चुन्हे शामिल हुयें| एक चूँहा बोला , “भाइयो हमें इस मुसीबत से छुटकारा पाना ही होगा| अपने-अपने सुझाव दो कि बिल्ली को कैसे मारा जाये या फिर कैसे छुटकारा पाया जाए”|

बहुत देर तक बाते चलती रही| फिर एक छोटा सा चूँहा आगे आया और बोला, “क्यूँ न हम बिल्ली के गले में घंटी बांध दें? बिल्ली जहाँ भी जाएगी घंटी बजने लगेगी और हम अपने-अपने बिल में छुप जायेंगे”|

यह सुनकर सभी चूँहो ने उस नन्हे चुन्हे की वाह-वाह करने लगे| इतने में एक बूढ़ा चूँहा बोला, ” वो सब तो ठीक है लेकिन बिल्ली के गले में घंटी बांधेगा कौन?”

सब चून्हे खामोश हो गए| कौन उस मौत के मुँह में जाना चाहेगा| इतने में बिल्ली की आवाज़ आई| बिल्ली की आवाज़ सुनकर सभी चुन्हे अपने-अपने बिल में भाग गए|

Moral of this kids story in hindi: सुझाव देना आसान है, परन्तु अमल करना मुश्किल


बाघ और गाय | Hindi story for kids

बाघ और गाय

एक घने जंगल में चार गाय रहती थी| चारो गायें में बहुत दोस्ती थी| वह जंगल में हर जगह एक साथ रहते थे| वह चारा खाने भी साथ जाया करते थे| इसकी एकता की वजह से जंगल का जंगली जानवर इनपर हमला नहीं करता था| क्योंकि यह चारो एक साथ मुसीबत का सामना करती थी|

बहुत दिनों से एक बाघ की नज़र इन चारो गाये पर थी| उसने इन गायों पर हमला किया लेकिन इन चारो ने मिलकर बाघ का सामना किया और बाघ को भगा दिया|

एक बार चारो गायों में लड़ाई हो गई| उन चारों ने एक दूसरे से अलग होने का फैसला किया| वह सभी अपने-अपने दिशा में चली गई| यह देखकर बाघ ने मौके का फायदा उठाया|

बाघ ने एक-एक करके सभी गायों पर हमला किया| उसने एक-एक करके सभी गायों को मार दिया| इस तरह सभी गायें अलग होकर अपनी जान गवा दी|

इससे क्या सिख मिलती है: एकता में ही शक्ति है, अनेकता में दुर्गति|


माँ की प्यारी सिख | Hindi story for kids

माँ की सीख

चेतन अपनी माँ के साथ एक बहुत अच्छे घर में रहता था| चेतन एक बहुत अच्छा लड़का था| वह हर वक़्त अपनी माँ का आदर करता था और माँ का कहना मानता था| चेतन की माँ बहुत अच्छी पकवान बनती थी| चेतन को पकवान खाना बहु पसंद था|

एक दिन चेतन की माँ ने बहुत बढ़िया कुकीज़ बनाकर, एक जार में रख दी और बाज़ार चली गई| बाज़ार जाने से पहले चेतन की माँ ने उससे कहा था कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कुकीज़ खा सकता है|

चेतन बहुत खुश हुआ| उसने जल्दी से अपनी पढ़ाई पूरी करली| अपनी माँ के लौटने से पहले ही कुकीज़ खानी चाही| वह एक स्टूल पर चढ़ गया, और उसने जार के अन्दर हाथ डालकर बहुत सारी कुकीज़ निकलने की कोशिश की|

लेकिन जार का मुँह छोटा होने के कारण वह अपना हाथ जार से बाहर नहीं निकाल सका| उसी समय उसकी माँ बाज़ार से लौट आई| जब उसने अपने बेटे को देखा तो वह हँसने लगी| उसने चेतन से कहा, “बेटा हाथ से ढेर सारी कुकीज़ को छोड़कर, केवल एक या दो कुकीज़ पकड़कर हाथ बाहर निकालो|

माँ की बात मानकर, चेतन ने सिर्फ दो कुकीज़ पकड़कर हाथ बहार निकला| उसका हाथ आसानी से बाहर निकाल गया| तब उसकी माँ ने प्यार से चेतन से कहा, “ऐसा करने से तुमने क्या सिखा?” चेतन ने कहा, “मैंने सिखा कि किसी भी चीज़ का लालच अच्छी बात नहीं है| हमें हर चीज़ उतनी ही लेनी चाहिए जितनी हमें ज़रुरत है|”

कहानी की सीख: हमें लालच नहीं करनी चाहिए|


शेर और गधे की दोस्ती | Hindi story for kids

गधा और शेर की दोस्ती

एक बार एक शेर और गधे में दोस्ती हो गई| दोनों एक साथ जंगल में घूमा करते थे| वह हर वक़्त एक साथ रहा करते थे| वो जहाँ भी जाते थे जानवरों में भगदड़ मच जाती थी| गधे को लगा कि दुसरे जानवर उससे डरने लगे हैं| लेकिन बाकी जानवर शेर को देखकर भाग जाते थे| वह अपने आप को बाकी जानवरों से ज़्यादा ताकतवर समझने लगा|

एक बार वह दोनों जंगल में टहल रहे थे| उन्हें रास्ते में भेड़ियों का एक झुंड दिखाई पड़ा| गधा उन्हें देखकर जोश में आ गया और जोर-जोर से चिल्लाने लगा| और फिर गधा भेड़ियों के पीछे भागा| भेड़िया शेर ली वजह से वहां से भाग गए|

गधा जब वापस शेर के पास आया तो शेर ने गधा से बोला, “दोस्त क्या हुआ? तुम भेड़ियों को देखकर बहुत गुस्सा हो गए थे|” गधा बोला, “तुमने देखा नहीं मुझे देखकर भेड़ियों में कैसे भगदड़ मच गया था|”

यह सुनकर शेर मुस्कराया और बोला, “तुम इसलिए खुश हो रहे हो| सब जानते हैं कि तुम मेरे दोस्त हो और मैं तुम्हारे साथ था| लेकिन ऐसी बेवकूफी उस वक़्त मत करना जब मैं तुम्हारे साथ न हूँ| नहीं तो भेड़िया तुम्हे खा जायेंगे|” फिर गधा ने शेर से माफ़ी मांगी और दोनों साथ चले गए|

Moral of story for kids in hindi: दुसरे के बल पर किसी से दुश्मनी नहीं लेनी चाहिए|


राक्षस और बच्चे | Story for kids in Hindi

राक्षस और बच्चा

एक बहुत बड़ा और सुन्दर बाग़ था| उस बाग़ में 12 बड़े-बड़े पेड़ थे| यह बाग़ एक राक्षस का था जो सात सालो से बहार गया हुआ था| एक दिन जब वो वापस आया तो उसने देखा कि उसके बाग़ में बच्चे खेल रहे थे|

राक्षस ने ऊंची आवाज़ में कहा, “तुम यहाँ क्या कर रहे हो? यह मेरी बाग़ है|” बच्चे घबराकर भाग गए| राक्षस ने उस बाग़ के चारो तरह ऊंची दीवार लगा दी| उसने दीवार पर एक चेतावनी लगा दी जिस पर लिखा था, “दूर रहो- अन्दर आना सख्त मना है|”

बच्चे उदास हो गए| उनके पास अब खेलने की जगह नहीं थी| जल्द ही बसंत ऋतू आ गई| लेकिन राक्षस के बाग़ में अभी भी शर्दी थी| पेड़ो पर फूल नहीं उगे| राक्षस ने मन ही मन सोचा, “बसंत ऋतू अआने में इतना वक़्त क्यूँ लग रहा है”|

एक दिन राक्षस सोया हुआ था| तभी उसके कानों में बच्चो के खेलने की आवाज़ सुनाई दी| उसने जब अपनी खिड़की से बहार देखा तो बाग़ की दीवार में एक बड़ा सा छेद करके बच्चे बाग़ में आ गए थे| राक्षस को देखकर सभी बच्चे उसी छेद से भाग गए| लेकिन एक छोटा सा बच्चा उसी बाग़ में रह गया|

राक्षस ने उस बच्चे को अपने हाथ में उठाया और सोचने लगा, “मैं कितना स्वार्थी था| अब मुझे पता चला बसंत ऋतू यहाँ क्यूँ नहीं आई| मैं दीवार गिरा दूंगा| मेरा बाग़ हमेशा के लिए बच्चो के खेलने का मैदान बन जाएगा|”

राक्षस ने एक बड़ा सा हथौड़ा लिया और दीवार को गिरा दिया| लोगों ने देखा राक्षस बच्चो के साथ खेल रहा था| बच्चे राक्षस को नमस्ते करके जाते| राक्षस ने पुछा, “वो छोटा सा बच्चा कहाँ है?” एक बच्चे ने जवाब दिया, “वो कहीं चला गया है|”

बच्चो हमेशा उस बाग़ में खेलने आते रहे| कई साल बीत गए| वह राक्षस अब बूढ़ा हो गया था| एक सर्दी की सुबह उसने देखा, एक पेड़ पर बहार दिखाई दे रही थी| उस पेड़ के नीचे वही छोटा बच्चा खड़ा था| राक्षस उसे देखकर बहुत खुश हुआ|

राक्षस ने उस बच्चे से कहा, “मेरे प्यारे बच्चे तुम वापस आ गए| आज मैं बहुत खुश हूँ| आज तुम्हारे कारण ही यह बाग़ स्वर्ग लगने लगा है| उसने उस बच्चे को अपने सीने से लगा लिया|

शिक्षा: हमें प्रेम भाव में रहना चाहिए|


लोमड़ी और कौआ | Story for kids in Hindi

चालक लोमड़ी और कौआ

बहुत पुरानी बात है| एक कौआ भोजन की तलाश में ईधर-ऊधर भटक रहा था लेकिन उसे भोजन नहीं मिला| आखिर में थक हारकर वह एक पेड़ पर जाकर बैठ गया| उसे एक प्लेट में एक पनीर का टुकड़ा दिखाई दिया|

वो प्लेट के पास पहुंचा और पनीर का वह टुकड़ा अपनी चोंच से उठा लिया और उड़ने लगा| बहुत से कौए उसके पीछे उड़ने लगे| वो इस पनीर के टुकड़े को इससे छीनना चाहते थे| वह सभी कौए को चकमा देने में कामयाब हो गया|

कौआ एक पेड़ की शाखा पर जाकर बैठ गया| एक लोमड़ी वहां से गुज़र रही थी| उसने कौए की चोंच में पनीर का टुकड़ा देखा| लोमड़ी के मुहं में पानी आ गया| उसने जल्द ही पनीर का वह टुकड़ा अपने कब्ज़े में लेने की एक योजना बनाई|

उसने कौए की तरफ देखी और बोली, “अरे कौवे भाई- मैं एक भोली भली लोमड़ी हूँ| मेरी सहेलियों ने बताया है कि तुम्हारी आवाज़ बहुत मीठी है| क्या यह बात सही है?” कौआ यह सुनकर हैरान हो गया| इससे पहले किसी ने भी उसकी आवाज़ की तारीफ़ नहीं की थी|

कौआ चुप रहा| लोमड़ी फिर बोली, “क्या तुम मेरे लिए अपनी मीठी आवाज़ में एक गाना सुना सकते हो|” कौआ उसकी बातो में आ गया| जैसे ही कौआ ने अपनी चोंच खोली पनीर उसकी चोंच ने नीचे गिर गया| लोमड़ी झट से उस पनीर को उठाकर वहां से चली गई| कौआ उदास हो गया|

इस कहानी से क्या सीख मिली: चापलूसों से बचो, इनका विश्वास नहीं करना चाहिए|


अहंकारी मूर्तिकार | Story for kids in Hindi

अहंकारी मूर्तिकार

बहुत समय पहले की बात है| एक मूर्तिकार था| वह ऐसी मूर्ति बनाता था जिसे देखकर लोगों को मूर्ति के जीवित हो जाने का भ्रम हो जाता था| आस पास के सभी गाँव में लोग उसके मूर्ति के कायल थे| लोग दूर-दूर से उसकी मूर्ति को देखने आते थे|

उस मूर्तिकार को अपने आप पर बहुत घमंड था| जीवन के सफ़र में एक समय ऐसा भी आया जब उसे लगने लगा कि अब उसकी मृत्यु होने वाली है| वह ज़्यादा समय तक जीवित नहीं रहेगा| उसे जब लगा कि जल्द उसकी मृत्यु होने वाली है| तब उसने यमदूतो को चकमा देने के लिए एक योजना बनाई|

उसने अपने शकल की 10 मूर्तियाँ बनाई और उन मूर्तियों के बीच जाकर खड़ा हो गया| जब यमदूत उसे लेने आये तब एक तरह की 11 आकृतियों को देखकर दंग रह गए| वह पहचान नहीं पा रहे थे कि इनमें से असली मनुष्य कौन है|

वह सोचने लगे अब क्या किया जाए| अगर वह मनुष्य की जान नहीं निकाल सके तो सृष्टि का नियम टूट जायेगा| और अगर सत्य जानने के लिए मूर्तियों को तोड़ा जाए तो कला का अपमान हो जायेगा|

आखिर में यमदूत ने मूर्तियों को देखते हुए कहा, “कितनी सुन्दर मूर्तियाँ बनी है| लेकिन मूर्ति में एक गलती है| काश मूर्ति बनाने वाला यहाँ होता तो मैं उसे उसकी गलती बता सकता|” यह सुनकर मूर्तिकार का अहंकार जाग उठा| उसने सोचा, “मैंने अपनी पूरी जिंदगी मूर्ति बनाने में दे दिया| भला मेरी मूर्ति में गलती कैसे हो सकती है|”

इतने में मूर्तिकार बोल उठा कैसी गलती? उतने में यमदूत ने उसे पकड़ लिया और कहा, “बस यही गलती तुम कर गए अपने अहंकार में कि बेजान मूर्ति बोला नहीं करती|”

कहानी से क्या सिक मिलती है: अहंकार ने इंसान को हमेशा परेशानी और दुःख के सिवा कुछ नहीं दिया|


दो आलसी | Story for kids in Hindi

दो आलसी

गर्मी का मौसम था| दो आदमी सुबह-सुबह एक आम के पेड़ के नीच आकर लेट गए| धीरे-धीरे धुप तेज़ होने लगी और पत्तो के बीच से होते हुए उनके चेहरे पर पड़ी| लेकिन वह दोनों फिर भी नहीं उठे|

इतने में एक पका हुआ आम पेड़ से टूटकर उन दोनों के बीच गिरा| एक आदमी ने कहा, “दोस्त जरा यह आम उठाकर मेरे मुहं में दाल दो| चखता हूँ कि यह मीठा है या नहीं| दुसरे आदमी ने कहा, “अरे कैसे दाल दूँ? एक कुत्ता मेरा मुहं चाट रहा है| पहले तुम इसे हटा दो|

इतने में एक ऊंट वाला वहां से गुज़र रहा था| पहले आदमी ने ऊंट वाले को आवाज़ लगाई और अपने पास बुलाया| ऊंट वाला उनके पास आ गया और पूछ क्या हुआ? आदमी ने कहा अरे भाई यह आम उठाकर मेरे मुहं में दाल दो|

ऊंट वाले ने ऊंची आवाज़ में कहा, “अच्छा इसी लिए तुम ने मुझे इतनी दूर से बुलाया| बगल में रखे आम भी तुमसे उठाया नहीं जाता| बड़े आलसी जान लगते हो| आलसी की मदद तो भगवान भी नहीं करता|” यह कहकर ऊंट वाला चला गया| आम दोनों आलसी आदमी के बेच पड़ा रहा|

शिक्षा: अपना काम दुसरो पर नहीं डालना चाहिए|


धोकेबाज़ भेड़िया और सारस | Story for kids in Hindi

धोकेबाज़ सियार और सारस

एक भेड़िया ने भैंसे का शिकार किया| वह उसके मांस को खा रहा था कि उसके गले में एक बड़ी से हड्डी फँस गई| वह दर्द से छटपटाने लगा| गले में बहुत दर्द हो रहा था| उसे लगा कि उसके जिंदगी का अंत आ गया है|

इतने में अचानक उसे एक सारस दिखाई दिया| भेड़िया ने बड़े मुश्किल से सारस से कहा, “सारस भैया मेरी मदद करो| मेरी गले में फंसी हड्डी को निकाल दो| तुम्हारा अहसान जिंदगी भर नहीं भूलूंगा और तुम्हे इनाम भी दूंगा|”

सारस ने भड़िया की मुहँ में अपनी गर्दन दाल दी और अपनी लम्बी चोंच की मदद से हड्डी को निकाल दिया| जिसके बाद भेड़िया के जान में जान आई|

इसके बाद सारस ने भेड़िया से अपना इनाम माँगा| इतने में भेड़िया ने कहा, “अरे मुर्ख इनाम मांगता है| शुक्र मानाओ कि मैं तुम्हे खा नहीं रहा हूँ|” यह बोलकर भेड़िये ने सारस को भगा दिया|

इस कहानी से क्या सिखा: नेकी उन्ही के साथ करनी चाहिए जो उनके लायक होते हैं|


कमज़ोर गधा | Story for kids in Hindi

कमज़ोर गधा

किसी व्यापारी के पास एक गधा था| उस गधे पर वह अपना नमक लादकर मंडी में बेचने ले जाता था| मंडी तक जाने में उसे एक नदी पार करना होता था| एक दिन गधा का पैर फिसला और वह पानी में गिर गया| व्यापारी ने उसे उठाने में उसकी मदद की| उसकी किस्मत अच्छी थी कि उसे चोट न लगी|

नमक पानी में पूरी तरह से घुल गई| गधे की पीठ एकदम हलकी हो गई क्यूंकि उस पर कोई वज़न ही न रहा| व्यापारी वहीँ से घर वापस लौटने लगा क्योंकि मंडी जाने का कोई लाभ ही नहीं रहा| यह देख गधे को मज़ा आ गया|

दुसरे दिन जब व्यापारी फिर से गधे पर नमक लादकर मंडी के लिए निकाल पड़ा| नदी पार करते समय गधा जानबूच कर पानी में गिर गया| फिर उसकी पीठ हलकी हो गई| व्यापारी को उसकी मक्कारी समझ में आ गई|

अगले दिन व्यापारी ने गधे के पीठ पर एक बहुत बड़ा रूई का गट्ठा लादा और चल पड़ा| गधे ने फिर वही चल अपनाई और पानी में गई गया| लेकिन रूई पानी में और भारी हो गई और गधे के पीठ का वज़न कई गुना बढ़ गया|

गधे पर लगा रूई इतना भारी हो गया कि गधा चल भी नहीं पा रहा था| जब गधा चल नहीं पा रहा था तब व्यापारी ने डंटे से उसकी खूब पिटाई की| उस दिन के बाद गधे ने पानी में गिरने की गलती नहीं की|

शिक्षा: हमें अपना काम पूरी इमानदारी से करनी चाहिए|


तेनाली रामा | Story in Hindi for kids

तेनाली राम

बहुत साला पहले विजय नगर में एक राजा राज करता था| उसका नाम कृष्ण देव राय था| एक बार उसके राज्य में चूँहो की भरमार हो गई| जहाँ भी देखो चून्हे ही चून्हे| राजा ने हुक्म सुनाया| हर घर में एक बिल्ली पालना अनिवार्य कर दी जाये| इसके अलावा हर घर में एक-एक गाय दी जाये ताकि बिल्ली को दूध मिल सके|

तेनाली राम का एक वजीर इस हुक्म से नाखुश था| उसके अनुसार यह सारा प्रयोजन ही मूर्खतापूर्ण था| उसने एक तरकीब सोचा| उसने गर्म दूध का प्याला अपने बिल्ली के सामने उसे पीने के लिए रख दिया| जैसे ही बिल्ली ने उस दूध को पीना चाह उसका मुहं जल गया|

राजा को हर जगह बिल्लियाँ नज़र आने लगी| वह अपने इस फैसले से बहुत खुश था| वह घर-घर जाकर देखता था कि सभी बिल्लियाँ ठीक है या नहीं| आखिर वह तेनाली राम के घर पहुंचा| राजा को तेनाली के घर कमज़ोर बिल्ली को देख गहरा सदमा लगा|

राजा ने तेनाली से कहा, “क्या सारा दूध सिर्फ तुम ही पिए जा रहे हो|” इतने में तेनाली बोला, “महाराज अगर आप जान बक्शे तो मैं सब कुछ सच-सच आपसे कह दूँ|” राजा ने कहा बताओ क्या सच है|

तेनाली ने कहा, “महाराज पता नहीं क्या हुआ? मेरी बिल्ली दूध ही नहीं पी रही है|” तेनाली ने बिल्ली के सामने दूध का प्याला रखा तो बिल्ली डरकर भाग गई|

यह देखकर राजा समझ गया कि तेनाली ने क्या किया है| राजा ने हुक्म सुनाया कि तेनाली को बंदी बना लिया जाए और सौ कोड़े इसके पीठ पर मारा जाए|

तेनाली ने नज़र नीचे करके कहा, “महाराज मुझे सजा दीजिये परन्तु जरा सोचिये हम इंसानों को पीने के लिए पर्याप्त दूध नहीं है तो क्या यह मुर्खता नहीं होगी कि हम सारा दूध बिल्लियों को पिला दे|”

राजा को तेनाली की बात समझ में आ गई और उसने तेनाली को माफ़ कर दिया| उसने अपने देशवासियों को वह गाय उनके परिवार को दूध पीने के लिए दान दे दी| बिल्लियाँ तो चून्हे खाकर भी अपना पेट भर सकती थी|

शिक्षा: मानव की सेवा सबसे पहले है|


निष्कर्ष

दोस्तों, मुझे उमीद है कि आपको story for kids in hindi पसंद आया होगा| इस short story in hindi की इस लिस्ट में आपको नई से लेकर पुरानी हर प्रकार की कहानी मिल जाएगी| moral story in hindi या shorts story for kids in hindi सिर्फ बच्चो को ही अच्छी नहीं लगती है बल्कि बड़े भी इसका खूब आनद उठाते हैं| आपको यह सभी बच्चो की कहानी कैसी लगी यह कमेंट में लिखकर ज़रूर बताएं|

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